सच बोलें तो अर्नब गोस्वामी अचानक कुछ भी नहीं करते। वह न तो बेवकूफ हैं और न ही अनजान। वह भारतीय न्यूज़ मीडिया के सबसे तेज़ दिमागों में से एक हैं। अगर आज उनका टोन बीजेपी के खिलाफ लगता है, तो इसके पीछे एक साफ़ वजह है।
आज का दर्शक टकराव, भावना और एंटी-एस्टैब्लिशमेंट डिबेट देखना चाहता है। अर्नब यह अच्छी तरह जानते हैं कि TRP शांति से नहीं, बल्कि ड्रामे से आती है। कभी-कभी नैरेटिव बदलना पड़ता है, क्योंकि न्यूज़ मीडिया वफादारी पर नहीं, व्यूअरशिप पर चलता है।
यह कोई नई बात नहीं है। मीडिया हाउस हमेशा जनता के मूड के हिसाब से अपनी लाइन बदलते रहे हैं। अर्नब बस इस गेम को समझदारी से खेल रहे हैं। दर्शक जो देखना चाहते हैं, वह वही दिखाते हैं — यही आज के न्यूज़ मीडिया की सच्चाई है।
